THIS POETRY DEDICATED  TO those NIBBI , UNMATURE  GIRLS ,when shesh are starting time not able to understand fake love AND  I TAKED 2 MINUT RIP. FOR  those


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'' तू तो अभी नादान है, तुझे समझ कहां  आएगा ''


दुनियां हमने देखी है तुझे देखना बहुत कुछ  बाकी है 

भोली शक्ल के पीछे उसका भेडिया रूप  देखना बाकी है

 मिलना मिलाना तो खेल है जिस्म का शिकार तुझे बनाएगा 

प्यार का हवाला देकर तेरा जिस्म नोच खायेगा 

  पर तू तो अभी नादान है ,तुझे  समझ कहाँ  आएगा 

मीठी मीठी बातें कर अपना  झूठा प्यार दिखायेगा

  यकीन मान चंद  लम्हों  में  उसका  तुझसे मन भर  जाएगा 

जब कभी रूत जाएगी तू ,तब न तुझे मनाएगा

तडपती तू  रह जाएगी पर वो  न वापस आएगा

पर तू तो अभी नादान है, तुझे समझ कहाँ  आएगा






देखे सपने ,अरमान ए चाहत आसुओ में बह  जायेगा

झूठी उसकी  बातें हर दिन ,तुझे  खंजर सा चुभायेगा

यकीनन  सारी उसकी यादें , दिल को तेरे  बंज़र  कर  जाएगा

हमम पर यह छल  तुझे  जीवन मे बहुत  कुछ सिखाएग

पर अभी तो तू नादान है ,तुझे समझ कहाँ  आएगा
  
अगर रही कसर  दिल दुखने में बाकी तब यह दौर फिर से आएगा 
 जिंदगी की सारी महत्वपूर्ण बातें बस यही उलझ के राह जायेगा 

क्यों हुआ कैसे हुआ ये  तुझे  समझने में कई सालों लग जाएगा 
 पर तू तो अभी नादान है ,तुझे  अभी समझ  नही आएगा //


WRITER _ प्रतीक बरेठ , सोनू साव



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